हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मै सिर्फ इस बात पर जोर देना चाहता हूँ कि उद्देश्य केवल नेताओ की हत्या करना नही था बल्कि पूरे सरकारी प्रणाली को गिराना था, उद्देश्य ईरान और उसकी ताक़त को कमज़ोर करना था। और जो हम 17 दिन के युद्ध के बाद देख रहे है वह यह है कि सरकार पहले से अधिक मज़बूत और पहले से अधिक खतरनाक हो गई है। और ईरान अब पहले अधिक शक्तिशाली हो चुका है।
हक़ीक़त तो यह कि ईरान वह प्राप्त कर लिया जिसे रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने पचास साल लगाए, अर्थात हुर्मुज जल मंडल नियंत्रण मध्य पूर्व एशिया मे अमेरिका बड़ी हिकमत अमली का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य था, ना कि इज़रायल। यह सबसे बड़ा उद्देशय था, और यह एक तबाहकुन असफ़लता है जिसे मै बढ़ते हुए तनाव का जाल कहता हूँ मैने दशको तक क्लिंटन के शासन मे भी देखा है। यह केवल राष्ट्रपति ट्रम्प तक सीमित नही है परंतु वह हमारी सेना की ताक़त से इस हद तक प्रभावित हो गए कि उन्होने समझ लिया कि यह हर उद्देश्य को प्राप्त कर सकती है, अर्थात यह हर प्रकार से क़ादिर ए मुत्लक़ है।
सत्य यह है कि हम रणनीतिक हिसाब से असफ़ल हो चुके है और इस जाल मे और अधिक फ़ंस रहे है। इसीलिए वह सभी सहयोगी जिनका आपने उल्लेख किया हमारे साथ इस गहरे संकट मे नही जाना चाहिए। यह एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है।
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